Wednesday, June 17, 2026

पुरी रथ यात्रा में भगदड़ से मचा कोहराम: 3 की मौत, कई घायल – प्रशासन पर विपक्ष का निशाना, जांच के आदेश

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ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा रविवार को अफरा-तफरी के माहौल में तब्दील हो गई, जब अचानक मची भगदड़ में तीन श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, भीड़ इतनी ज्यादा थी कि दम घुटने और भारी दबाव में कई लोग ज़मीन पर गिर पड़े और भगदड़ के दौरान उनके ऊपर से लोग गुजरते चले गए। यह घटना गुंडिचा मंदिर के पास सराधाबली क्षेत्र में सुबह करीब 4-5 बजे हुई, जब भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़ पड़े थे। भीड़ के अचानक बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि फिलहाल हालात काबू में हैं और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। खुद मुख्यमंत्री स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
हादसे के बाद विपक्ष ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसे ‘घोर प्रशासनिक विफलता’ बताते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह नदारद था और सबसे पहले राहत का काम आम श्रद्धालुओं ने ही शुरू किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर प्रशासन से सवाल किया कि जब पहले से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की आशंका थी, तो इंतजाम इतने लचर क्यों रहे? उन्होंने आगामी धार्मिक आयोजनों के लिए भीड़ नियंत्रण के लिए ठोस और सख्त इंतजाम करने की मांग की है।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि पहले से ही संकरी सड़कों पर भीड़ का दबाव था। इसी दौरान अनुष्ठान सामग्री से भरे दो बड़े ट्रक जब अंदर घुसे तो स्थिति और बिगड़ गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों की संख्या बेहद कम थी और रथ यात्रा का मार्ग पूरी तरह अव्यवस्थित था। इससे एक दिन पहले भी शनिवार को भीषण गर्मी और भारी भीड़ के कारण करीब 750 श्रद्धालु बीमार पड़ गए थे। इनमें 12 लोगों की हालत गंभीर बताई गई और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। एक श्रद्धालु को गंभीर हालत में कटक रेफर किया गया है।
फिलहाल प्रशासन ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सुरक्षा इंतजामों को और पुख्ता करने का भरोसा दिया गया है, ताकि आने वाले दिनों में रथ यात्रा जैसी धार्मिक आस्थाओं के पर्व में किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

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