CBI अफसर बनकर 2.52 करोड़ की ठगी, दिल्ली से 3 आरोपी गिरफ्तार
90 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर को ‘ऑनलाइन अरेस्ट’ में रखकर ठगा, देशभर में फैला साइबर नेटवर्क उजागर
ग्वालियर साइबर क्राइम ब्रांच को 2.52 करोड़ रुपये की बड़ी डिजिटल ठगी के मामले में अहम सफलता मिली है। पुलिस ने दिल्ली से तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 7 हो गई है। आरोपी एक संगठित साइबर गिरोह का हिस्सा हैं, जो खुद को CBI अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाता था।
CBI अफसर बनकर रची साजिश:
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने 90 वर्षीय रिटायर्ड एयरफोर्स रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण महादेव को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क किया। उन्होंने खुद को CBI अधिकारी बताया और आधार-पैन के दुरुपयोग का डर दिखाकर डॉक्टर को “ऑनलाइन अरेस्ट” कर लिया।
27 दिन तक वीडियो कॉल पर रखा नियंत्रण:
आरोपियों ने डॉक्टर को 27 दिनों तक लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा। इस दौरान उन्हें मानसिक दबाव में रखकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2 करोड़ 52 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। डॉक्टर और उनकी पत्नी ने अपनी सफाई दी, लेकिन ठगों ने उनकी एक नहीं सुनी।
15 राज्यों के 300 खातों में घुमाई रकम:
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम पहले दिल्ली, नोएडा, गुंटूर और वाराणसी के 5 खातों में भेजी गई। इसके बाद यह राशि देश के 15 राज्यों के 300 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इसमें दिल्ली, यूपी, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, असम और कर्नाटक जैसे राज्य शामिल हैं।
टेलीग्राम से चलता था पूरा नेटवर्क:
पुलिस के अनुसार, पूरा साइबर गिरोह टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था। आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे, जिन्हें “म्यूल अकाउंट” के रूप में गैंग को बेचा जाता था। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को ट्रेस करना मुश्किल बनाया जाता था।
दिल्ली से 3 आरोपी गिरफ्तार:
तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से 6 पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
आरोपियों की भूमिका:
1. हरीश गढ़वाल (27) – बैंक खाते खुलवाने और ऑपरेट करने का काम करता था
2. सौरव यादव (23) – इसके खाते में 28 लाख रुपये ट्रांसफर हुए
3. शरद डेहरिया (20) – जॉइंट अकाउंट ऑपरेट कर रहा था
फर्जी फर्म के जरिए हुआ ट्रांजैक्शन:
जांच में दिल्ली की एक फर्जी फर्म “जिंगा क्रंच एंड स्नैक्स” का नाम सामने आया। इस फर्म के अकाउंट में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी। फर्म खोलने वालों को इसके बदले करीब 2.5 लाख रुपये कमीशन मिला था।
फिलहाल पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है और इस साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग अब बेहद संगठित और तकनीकी तरीके से काम कर रहे हैं, ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है

