झांसी रोड थाना पुलिस की बड़ी कामयाबी; एक ही चेहरे का इस्तेमाल कर अलग-अलग आईडी पर बेची गईं दर्जनों सिम।
POS संचालक 500 रुपए देकर किराए पर लेता था चेहरा; ग्वालियर में फेशियल ऑथेंटिकेशन धोखाधड़ी की पहली FIR दर्ज।
ग्वालियर। जिले में पुलिस ने जालसाजी और तकनीकी धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन FACE’ (फेशियल ऑथेंटिकेशन कंप्लाइंस इंफोर्समेंट) के तहत झांसी रोड थाना पुलिस ने फर्जी सिम एक्टिवेट करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। इस मामले में ग्वालियर की पहली FIR दर्ज की गई है, जिसमें 80 सिमों को अवैध तरीके से सक्रिय करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
पुलिस जांच के अनुसार, Vodafone Idea (VI) के POS संचालक उमेश कुशवाह ने सिम एक्टिवेशन की प्रक्रिया में बड़ी सेंध लगाई थी। उमेश, आधार कार्ड के वेरिफिकेशन के समय अनिवार्य ‘लाइव फोटो’ के लिए एक ही व्यक्ति के चेहरे का बार-बार इस्तेमाल करता था। इसके लिए उसने आशीष नागर नाम के युवक को काम पर रखा था, जिसे वह हर सिम एक्टिवेशन के बदले 500 रुपए का भुगतान करता था।
एक चेहरा और 80 अलग-अलग पहचान
हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने महज एक व्यक्ति (आशीष नागर) के चेहरे का उपयोग कर अलग-अलग नाम और पते के पहचान पत्रों पर 80 सिम एक्टिवेट कर दीं। इन फर्जी सिमों को बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया गया। पुलिस का मानना है कि ऐसी फर्जी सिमों का उपयोग अक्सर साइबर अपराध और आतंकी गतिविधियों में किया जाता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दिया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपी की तलाश
झांसी रोड थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए POS संचालक उमेश कुशवाह और सहयोगी आशीष नागर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आशीष नागर को हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। मुख्य आरोपी उमेश कुशवाह फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
बड़े खुलासे की उम्मीद
पुलिस का मानना है कि यह केवल शुरुआत है। हिरासत में लिए गए आरोपी से पूछताछ के बाद जिले में चल रहे अन्य फर्जी सिम वितरकों और एक्टिवेशन केंद्रों का भी पर्दाफाश हो सकता है। ‘ऑपरेशन FACE’ के तहत अब जिले के अन्य टेलीकॉम सेंटरों की भी जांच की जा रही है।

