Saturday, June 13, 2026

MP की जेलों में बदलाव: अब महिला बंदियों को भी मिलेगा ‘खुली जेल’ का सुख

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MP की जेलों में बदलाव: अब महिला बंदियों को भी मिलेगा ‘खुली जेल’ का सुख

ग्वालियर सेंट्रल जेल में DG जेल डॉ. वरुण कपूर ने दी जानकारी; प्रदेश की सभी जेलों में 18 करोड़ में लगेगी इलेक्ट्रिक फेंसिंग

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के जेल विभाग में सुधार और नवाचार (Innovation) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब प्रदेश की महिला बंदियों को भी पुरुष बंदियों की तरह ‘खुली जेल’ (Open Jail) में रहने का अवसर मिलेगा। अभी तक नियमों के चलते यह सुविधा केवल पुरुषों तक सीमित थी, लेकिन अब सरकार ने इसे महिलाओं के लिए भी लागू करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

यह महत्वपूर्ण घोषणा मध्यप्रदेश के जेल महानिदेशक (DG) डॉ. वरुण कपूर ने ग्वालियर सेंट्रल जेल में आयोजित ‘शांति संदेश’ कार्यक्रम के दौरान की। इस अवसर पर नाभा द्वाराचार्य पीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव: अपराधी से नहीं, अपराध से घृणा करें

जेल महानिदेशक ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जो स्वयं जेल विभाग के मंत्री भी हैं, जेलों को सुधार गृह बनाने के पक्षधर हैं। डॉ. कपूर ने कहा, “अभी तक नियमों के कारण महिला बंदियों के लिए खुली जेल प्रतिबंधित थी। हमने अब 10% कुटिया (ओपन सेल) का प्रस्ताव तैयार किया है, जो जल्द ही लागू होगा। इससे महिला बंदी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगी।”

कार्यक्रम में स्वामी सुतीक्ष्णदास महाराज ने आध्यात्मिक संदेश देते हुए कहा कि जेलों में बंदियों को आध्यात्म से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि समाज को अपराध से घृणा करनी चाहिए, अपराधी से नहीं, ताकि उसे सुधरने का मौका मिले।

18 करोड़ से अभेद्य होंगी प्रदेश की जेलें

सुरक्षा के मोर्चे पर भी विभाग बड़े निवेश कर रहा है। DG डॉ. वरुण कपूर ने जानकारी दी कि:

प्रदेश की जेलों की सुरक्षा और प्रबंधन सुधारने के लिए 18 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है।
वर्तमान में ग्वालियर सहित प्रदेश की केवल 15 जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग है।
जल्द ही प्रदेश की सभी जेलों में हाई-टेक इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जाएगी ताकि सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो सके।

सुधारात्मक गतिविधियों पर जोर

जेल प्रशासन का लक्ष्य केवल कैदियों को बंद रखना नहीं, बल्कि उनकी मनोदशा में सुधार करना है। ग्वालियर सेंट्रल जेल में हुआ यह आयोजन इसी कड़ी का हिस्सा था, जहां संगीत, आध्यात्म और शांति के संदेश के जरिए बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और आचरण में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया गया।

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