ग्वालियर में लिफ्ट मांगकर जेब काटने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह आरोपी आगरा से जेब काटने के लिए ग्वालियर आते थे। बाजार में घूमकर उन लोगों को ढूंढते थे जिनकी जेब में पैसा है और उसके बाद जेबकतरे गाड़ी पर लिफ्ट मांगकर उनकी जेब साफ कर देते थे। पैसा हाथ में आने के बाद गिरोह शहर में नहीं रुकता था और आगरा की ट्रेन या बस पकड़ कर भाग जाते थे। वही पुलिस अब इस गैंग से पूछताछ में जुट गई है।
ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के बाजार के सीसीटीवी फुटेज से पता चला की जेबकटी की वारदात में विजय उर्फ बाबा आदिवासी निवासी भीम नगर थाटीपुर शामिल है। उससे पूछताछ में खुलासा हुआ कि जेबकटी का धंधा रामू उर्फ सबा आदिवासी और संदीप कोरकू निवासी बाह आगरा उत्तर प्रदेश चला रहे हैं। यह दोनों रोज आगरा से आते हैं। शहर में इन दोनों ने जेबकटों की बड़ी टीम बनाई है। गैंग के लोग मेन बाजारों में मोटी खरीदारी करने वालों को व्यक्ति को ढूंढते थे। खुलासे पर दोनों सरगनाओं को भी पुलिस ने आगरा से धर दबोच लिया है। दोनों सरगनाओं ने खुलासा किया है कि गैंग मेंबर बाजार में खरीदारी करने वालों पर नजर रखती है। अक्सर लोग पूरी रकम एक जेब में ही रखते हैं और छोटे बड़े सौदे के दौरान जेब का पूरा पैसा हर बार निकाल कर भुगतान करते हैं। जेबकट टीम इन लोगों को ताड़ लेती है। विजय उर्फ लंगडा का यही काम था। उसका इशारा मिलने पर रामू और संदीप उस व्यक्ति से लिफ्ट मांगकर उसकी जेब से रकम उड़ाते थे। जेबकतरों ने बताया भीड़ में लोग उनकी बातों को नहीं समझें इसलिए जेबकट गैंग कोडवर्ड में बात करती है। अगर बाजार में पुलिस का मूवमेंट होता है तो बोला जाता है मक्खी घूम रही है। कोड सुनकर टीम दाएं बाएं हो जाती है। इसी तरह टारगेट को मामू कहते हैं। सात दिन पहले जेबकतरों ने पोस्ती खाना मुरार निवासी कमल सिंह कुशवाह से मुरार जिला अस्पताल से उनकी गाड़ी पर लिफ्ट मांगकर उनकी जेब से 49 हजार रुपया उड़ाया था। इसके बाद से पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। फिलहाल पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ चोरी की अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर शहर में हुई अन्य वारदातों को लेकर भी पूछताछ शुरू कर दी है।

