Friday, June 12, 2026

जन्माष्टमी पर ग्वालियर के 104 साल पुराने गोपाल मंदिर में भव्य उत्सव….100 करोड़ के बेशकीमती गहनों से सजाए गए राधाकृष्ण 

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जन्माष्टमी पर ग्वालियर के 104 साल पुराने गोपाल मंदिर में भव्य उत्सव….100 करोड़ के बेशकीमती गहनों से सजाए गए राधाकृष्ण 

 

पूरे देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है, और इसी मौके पर ग्वालियर का 104 साल पुराना ऐतिहासिक गोपाल मंदिर भक्ति और आस्था का केंद्र बन गया है। इस मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को 100 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा के बेशकीमती और दुर्लभ गहनों से सजाया गया है। यह अलौकिक और मनमोहक दृश्य देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसे देखने के लिए भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं।

गोपाल मंदिर, जो कि फूलबाग में स्थित है, सिंधिया रियासत के समय बना था। जन्माष्टमी पर यहां 24 घंटे का भव्य उत्सव मनाया जाता है। भगवान को पहनाए गए ये गहने रियासतकालीन हैं और इनमें हीरे, मोती, पन्ना जैसे अनमोल रत्न जड़े हुए हैं। इन गहनों को साल भर बैंक के लॉकर में कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है और जन्माष्टमी के दिन ही इन्हें 24 घंटे के लिए मंदिर लाया जाता है।

सिंधिया राजवंश की अनूठी परंपरा

गोपाल मंदिर की स्थापना साल 1921 में तत्कालीन शासक माधवराव प्रथम ने करवाई थी। उन्होंने ही राधा-कृष्ण की पूजा के लिए चांदी के बर्तन और श्रृंगार के लिए रत्नों से जड़े सोने के आभूषण बनवाए थे। इन आभूषणों में कुछ खास हैं: हीरे-जवाहरात से जड़ा सोने का मुकुट, पन्ना और सोने का सात लड़ी वाला हार, 249 शुद्ध मोतियों की माला, हीरे जड़े हुए कंगन और सोने की बांसुरी, विशाल चांदी का छत्र और 50 किलो चांदी के बर्तन, सोने की नथ, झुमके, चूड़ियां और कड़े शामिल है।

पहले, रियासतकाल में भगवान हमेशा इन गहनों से सजे रहते थे। लेकिन 1956 में मध्य प्रदेश के गठन के बाद इन आभूषणों को बैंक के लॉकर में रख दिया गया। साल 2007 में, तत्कालीन महापौर की पहल पर यह परंपरा फिर से शुरू हुई कि हर साल जन्माष्टमी पर इन गहनों को निकालकर भगवान का श्रृंगार किया जाए। तब से, हर साल ये गहने कड़ी सुरक्षा में बैंक से लाए जाते हैं और राधाकृष्ण को पहनाएं जाते है, ताकि भक्त इस दिव्य रूप के दर्शन कर सकें।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

भक्तों की भारी भीड़ और बेशकीमती गहनों की सुरक्षा के लिए मंदिर में कड़े इंतजाम किए गए हैं। लगभग डेढ़ सौ से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी और सीसीटीवी कैमरों की मदद से पूरे परिसर पर निगरानी रखी जा रही है। भक्तों का मानना है कि इस दिन यहां दर्शन करने से उनकी हर मन्नत पूरी होती है, और यह नजारा उन्हें मथुरा जैसा अनुभव कराता है। इस अद्भुत श्रृंगार को देखने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जो देर रात तक जारी रहेंगी।

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