Saturday, June 13, 2026

ग्वालियर में आवारा कुत्तों के लिए डॉग शेल्टर बनाने की कवायद तेज़, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

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ग्वालियर में आवारा कुत्तों के लिए डॉग शेल्टर बनाने की कवायद तेज़, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

 

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डॉग बाइट के मामलों पर चिंता जताते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि अब आवारा कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए, बल्कि उनके लिए शेल्टर होम बनाए जाएँ। इस आदेश के बाद, ग्वालियर नगर निगम भी हरकत में आ गया है और शहर में डॉग शेल्टर बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

ग्वालियर में कुत्तों की मौजूदा स्थिति

* शेल्टर होम का अभाव: ग्वालियर शहर में फिलहाल एक भी डॉग शेल्टर मौजूद नहीं है।
* धीमा नसबंदी अभियान: कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए शहर में सिर्फ एक एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर है। यह सेंटर दो महीने तक बंद रहा था और हाल ही में दोबारा शुरू हुआ है। 4 से 12 अगस्त के बीच, यहाँ सिर्फ 161 कुत्तों की नसबंदी की जा सकी, जबकि शहर में हजारों की संख्या में आवारा कुत्ते सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं।
* प्रमुख इलाके: सिटी सेंटर, मुरार, हजीरा, तानसेन नगर, थाटीपुर और नई सड़क जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में अक्सर कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड देखे जाते हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना रहता है।

नसबंदी के बाद भी खतरा

पहले कुत्तों की नसबंदी के बाद दो-तीन दिनों तक देखभाल में रखकर वापस उसी जगह पर छोड़ दिया जाता था। स्थानीय वेटनरी डॉक्टरों का मानना है कि नसबंदी से कुत्तों की आक्रामकता कम हो जाती है, लेकिन कई बार नसबंदी के बाद भी उनके काटने की घटनाएँ सामने आई हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अब शेल्टर होम बनाने पर जोर दिया है, ताकि आक्रामक कुत्तों को स्थायी रूप से वहाँ रखा जा सके और सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश मुख्य रूप से दिल्ली के लिए था, लेकिन ऐसे मामलों में कोर्ट के फैसले अक्सर पूरे देश में लागू होते हैं। इसलिए इसे देखते हुए, ग्वालियर नगर निगम भी अब डॉग शेल्टर बनाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

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