Saturday, June 13, 2026

ग्वालियर व्यापार मेला: ई-टेंडरिंग के खिलाफ व्यापारियों का विरोध, पारंपरिक आवंटन प्रक्रिया बहाली की मांग

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ग्वालियर व्यापार मेला: ई-टेंडरिंग के खिलाफ व्यापारियों का विरोध, पारंपरिक आवंटन प्रक्रिया बहाली की मांग

 

श्रीमंत माधवराव सिंधिया व्यापार मेला प्राधिकरण द्वारा दुकानों के आवंटन के लिए ई-टेंडरिंग प्रक्रिया लागू करने के विरोध में आज व्यापारियों ने मेला कार्यालय के सामने जोरदार धरना प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए इसे व्यापार विरोधी करार दिया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण ने इस बार दुकानों के आवंटन के लिए पारंपरिक लॉटरी या पुरानी आवंटन प्रक्रिया के बजाय ई-टेंडरिंग प्रणाली अपनाने का फैसला किया है। व्यापारियों का आरोप है कि यह नई प्रक्रिया छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। उनका मानना है कि ई-टेंडरिंग से बड़े कारोबारी ही अधिक दुकानें हासिल कर पाएंगे, जिससे छोटे व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। व्यापारियों की मांग है कि दशकों से चली आ रही पारंपरिक आवंटन प्रक्रिया को ही बहाल किया जाए, जो सभी के लिए निष्पक्ष और सुलभ थी।

धरने में शामिल हुए प्रमुख संगठन और हस्तियां

इस आक्रोशपूर्ण धरने में मेला प्राधिकरण के पूर्व पदाधिकारियों के साथ-साथ कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (केट), अचलेश्वर ट्रस्ट और विभिन्न अन्य व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी एकजुटता दिखाई। सभी ने एक स्वर में ई-टेंडरिंग को अनुचित बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया।

धरने में मेला व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेंद्र भदकारिया ने कहा कि यह फैसला सीधे तौर पर व्यापारियों के व्यवसाय को प्रभावित करेगा। उन्होंने मांग की है कि पारंपरिक आवंटन प्रक्रिया तुरंत बहाल की जाए और मेला प्राधिकरण बोर्ड का गठन भी किया जाए ताकि व्यापारियों की समस्याओं का उचित समाधान हो सके।

इस मौके पर मेला प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक शर्मा, केट के राष्ट्रीय संगठन मंत्री भूपेंद्र जैन, जगदीश उपाध्याय, महेश मुद्गल, अनुज सिंह गुर्जर, संजय दीक्षित, राजू चड्डा सहित कई प्रमुख व्यापारी नेता और बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित थे।

व्यापारियों की चेतावनी

व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया और ई-टेंडरिंग का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और भी तेज़ किया जाएगा। वे अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

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