शहडोल जल चौपाल बनी ‘ड्राई फ्रूट दावत’: जीतू पटवारी बोले – “पेट इंसानों जैसे थे, खा गए भैंसों जैसा”
मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में जल संरक्षण जागरूकता अभियान के तहत आयोजित एक ‘जल चौपाल’ अब गंभीर विवादों में घिर गई है। इस कार्यक्रम में अधिकारियों की कथित ‘ड्राई फ्रूट दावत’ पर हुए भारी भरकम खर्च को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटवारी ने तंज कसते हुए कहा, “पेट इंसानों जैसे थे, खा गए भैंसों जैसा।”
जल चौपाल का उद्देश्य और ‘शाही’ मेहमान नवाजी
दरअसल, बीते महीने शहडोल जिले के गोहपारू जनपद की ग्राम पंचायत भदवाही में जल संरक्षण का संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक चौपाल का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर कनिष्ठ कर्मचारियों और ग्रामीणों की भागीदारी रही।

लेकिन, इस ‘जल संरक्षण’ कार्यक्रम में दिखा खर्च किसी भव्य शादी-ब्याह की दावत से कम नहीं था। पंचायत रजिस्टर में दर्ज खर्चों के अनुसार, जल चौपाल में 5 किलो काजू, 5 किलो बादाम, 3 किलो किशमिश, 30 किलो नमकीन, 20 बिस्कुट पैकेट, 6 किलो दूध, और 4 किलो शक्कर की खपत दर्ज की गई। इसके अलावा 2 किलो घी का सेवन भी अधिकारियों को कराया गया। इस मेहमान नवाजी पर कुल 19,010 रुपए खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त 5,260 रुपए का एक और बिल निकाला गया, जिसमें विशेष रूप से ‘घी’ शामिल था। यानी कुल खर्च 24,270 रुपए से अधिक रहा।
कांग्रेस का तीखा तंज “भ्रष्टाचार संरक्षण अभियान”
इस घटना पर कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा है और इसे ‘जल संरक्षण अभियान’ नहीं, बल्कि ‘भ्रष्टाचार संरक्षण अभियान’ बताया है। जीतू पटवारी ने शहडोल की एक पुरानी घटना बताते हुए कहा कि 24 लीटर पेंट से 443 लोगों ने पुताई कर दी थी। अब देखिए 14 लोग जिस तरीके से ड्राई फ्रूट खा गए, लगता है कि पेट तो इंसानों जैसे थे, लेकिन खा भैंसों जैसा गए और पचा भी गए। पटवारी ने आगे कहा कि राज्य सरकार के किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार 50% से कम नहीं है।
कांग्रेस का कहना है कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान के नाम पर जनता के पैसे से अफसरों को मेवा-मिष्ठान परोसा गया। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि जब कार्यक्रम का उद्देश्य पानी बचाना था, तो अधिकारियों की थाली में काजू-बादाम और घी क्यों परोसे गए?
उच्च स्तरीय जांच की मांग और आंदोलन की चेतावनी
विपक्ष ने इस पूरे आयोजन की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे आयोजनों से न केवल जनता की भावनाओं से खिलवाड़ हो रहा है, बल्कि सरकारी धन का भी घोर दुरुपयोग हो रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वह सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगी।
अब तक इस मामले में राज्य सरकार की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने रजिस्टर में दर्ज खर्चों की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने किसी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया है।

