Saturday, June 13, 2026

मध्यप्रदेश में आज ठप रहेंगे बैंक: 40 हजार कर्मी हड़ताल पर, बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

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मध्यप्रदेश में आज ठप रहेंगे बैंक: 40 हजार कर्मी हड़ताल पर, बैंकिंग सेवाएं प्रभावित

 

मध्यप्रदेश के करीब 40 हजार बैंककर्मी आज एकदिवसीय हड़ताल पर रहेंगे, जिससे प्रदेश भर की बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। यह हड़ताल 17 सूत्रीय मांगों के समर्थन में बुलाई गई है, जिसका असर मध्यप्रदेश की लगभग साढ़े 8 हजार बैंक शाखाओं पर देखने को मिलेगा।

एक तरफ बिहार में आज विपक्षी पार्टियों ने भारत बंद बुलाया है, तो दूसरी तरफ पूरे देश में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े करीब 25 करोड़ कर्मचारी और मजदूर हड़ताल पर हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश में भी बुधवार को बैंककर्मी सड़कों पर उतर आए।

एमपी में करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे प्रदेश की करीब 8,500 बैंक शाखाओं में कामकाज रुक गया है। बैंककर्मियों की मुख्य मांगों में निजीकरण पर रोक, पुरानी पेंशन योजना को वापस लाना और खाली पदों पर भर्ती करना शामिल है। हड़ताल की वजह से आम लोगों को बैंकिंग कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

क्यों हो रही है यह हड़ताल?

यह अखिल भारतीय बैंक हड़ताल केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जन एवं श्रम विरोधी नीतियों का विरोध करना और बैंकिंग व वित्तीय संस्थानों से संबंधित कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को पूरा करवाना है।

इस हड़ताल को ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) जैसे प्रमुख बैंक यूनियनों का समर्थन प्राप्त है।

कौन-कौन शामिल होगा?

इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ निजी बैंक, विदेशी बैंक, सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के 40 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी हिस्सा लेंगे। इन सभी की भागीदारी से आज पूरे मध्यप्रदेश में बैंकों का कामकाज पूरी तरह से ठप रहेगा।

एमपी में हड़ताल पर बैंककर्मी, सरकार से मांगे पूरी करने की अपील

मध्य प्रदेश में बैंककर्मियों ने अपनी कई मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने की योजना को रोका जाए।

बैंककर्मी चाहते हैं कि सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों को जल्दी पूरा किया जाए। वे चाहते हैं कि सरकारी बैंक और बीमा कंपनियां मजबूत रहें और उनमें निजीकरण या शेयर बेचने (विनिवेश) की प्रक्रिया बंद की जाए।

कर्मियों की मांग है कि सरकारी बीमा कंपनियों को मिलाकर एक ही कंपनी बनाई जाए और बैंकों में नई भर्तियां की जाएं ताकि लोगों को अच्छी सेवा मिले।

बैंककर्मी ठेके पर या आउटसोर्सिंग से काम कराए जाने का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई पेंशन योजना (एनपीएस) बंद कर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) फिर से शुरू की जाए।

वे चाहते हैं कि बड़े कारोबारियों से बकाया कर्ज सख्ती से वसूला जाए। साथ ही, नए श्रम कानून जो कर्मचारियों के हक को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें लागू न किया जाए।

बैंक कर्मचारी अपने पुराने लंबित मामलों को भी जल्दी सुलझाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वे चाहते हैं कि आम लोगों से बैंक सेवा शुल्क कम लिया जाए और जीवन व स्वास्थ्य बीमा पर लगने वाला जीएसटी हटाया जाए।

बैंककर्मियों ने सरकार से अपील की है कि उनकी इन मांगों को जल्द पूरा कर कर्मचारियों और आम ग्राहकों दोनों को राहत दी जाए।

ग्राहकों को होगी परेशानी

बैंकों की इस हड़ताल से आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। चेक क्लियरिंग, नकद जमा और निकासी, ऋण संबंधित कार्य, पासबुक अपडेट और अन्य बैंकिंग लेनदेन आज पूरे दिन बाधित रहेंगे। हालांकि, एटीएम सेवाएं चालू रहने की संभावना है, लेकिन उनमें भी नकदी की कमी हो सकती है। ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग कार्य आज के लिए टाल दें या वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करें।यह हड़ताल सरकार और बैंक प्रबंधन पर उनकी मांगों को मानने का दबाव बनाने के लिए एक बड़ा कदम है।

भोपाल में कौन-कौन से बैंक रहेंगे बंद?

अगर राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां के सरकारी, निजी, विदेशी, सहकारी और ग्रामीण बैंकों के 40 हजार से ज्यादा अफसर और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इस वजह से भोपाल की करीब 400 बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा। यानि भोपाल में भी हड़ताल का पूरा असर दिखेगा।

भोपाल की 400 बैंक शाखाओं में करीब 5 हजार कर्मचारी और अफसर हड़ताल में शामिल होंगे। इससे बैंकिंग काम रुक जाएगा।

ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता वीके शर्मा ने बताया कि यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल केंद्र सरकार की आम जनता और कर्मचारियों के खिलाफ नीतियों के विरोध में बुलाई गई है। इसके साथ ही उनकी 17 मांगों को पूरा करने की मांग की गई है।

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