Saturday, June 13, 2026

‘यूपी टाइगर’ के नाम से लोकप्रिय पूर्व कृषि मंत्री आनंद सिंह का 86 वर्ष की आयु में निधन

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‘यूपी टाइगर’ के नाम से लोकप्रिय पूर्व कृषि मंत्री आनंद सिंह का 86 वर्ष की आयु में निधन

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘यूपी टाइगर’ नाम से मशहूर पूर्व कृषि मंत्री और सांसद आनंद सिंह का आज 86 साल की उम्र में लखनऊ में निधन हो गया। उनके जाने से पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई है। वह चार बार गोंडा से लोकसभा सांसद रहे और 2012 में गौरा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते थे।

आनंद सिंह कई दिनों से बीमार थे और लखनऊ के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। आज उन्होंने वहीं आखिरी सांस ली। उनका पार्थिव शरीर अब उनके गांव गोंडा ले जाया जाएगा, जहां सोमवार को उनका पार्थिव शरीर मनकापुर कोट लाया गया। जहांपर उनका अंतिम संस्कार होगा।

एक लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक करियर 

आनंद सिंह का जन्म 4 जनवरी 1939 को हुआ था। गोंडा संसदीय क्षेत्र से 5वीं , 7वीं , 8वीं और 9वीं लोकसभा के लिए संसद सदस्य चुने गए थे। 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में वह कृषि मंत्री भी रहे। इसके बाद से उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था। उनके पुत्र गोंडा से भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान में केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री है। आनंद सिंह ने कई सालों तक राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उनकी तेज आवाज, बेबाक बोलने का तरीका और आम लोगों से जुड़ाव के कारण ही लोग उन्हें ‘यूपी टाइगर’ कहते थे।उन्होंने गोंडा से चार बार लोकसभा सांसद बनकर इलाके की आवाज संसद तक पहुंचाई। सांसद रहते हुए वे हमेशा किसानो और गांव के लोगों की समस्याओं को पूरे दम से उठाते थे।

इसके बाद उन्होंने यूपी की राजनीति में भी बड़ा रोल निभाया। साल 2012 में वे समाजवादी पार्टी से विधायक बने और प्रदेश के कृषि मंत्री भी रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों के लिए कई योजनाएं बनाईं और उन्हें लागू भी किया।

यूपी टाइगर की मिली थी उपाधि

पूर्व मंत्री के करीबी केबी सिंह ने बताया कि राजा आनंद सिंह एक दो बार नहीं, चार बार सांसद रहे। पूर्वांचल की राजनीति में अपने सियासी दबदबे को लोहा मनवाने वाले मनकापुर के राजा आनन्द सिंह को यूपी टाइगर के नाम से जाना जाता था। एक वक्त की बात थी कि कांग्रेस पार्टी उन्हें सादा सिम्बल दे देती थी, फिर आनंद सिंह जिसे चाहते नाम भरकर सिम्बल दे देते थे। जिसके सिर पर मनकापुर कोट का हाथ होता था वह सांसद, विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख बन जाता था। वर्ष 2012 में राजा आनंद सिंह ने गौरा विधान सभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता और प्रदेश की अखिलेश सरकार में कृषि मंत्री बने थे। लेकिन तब तक वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे।

जनता के सच्चे नेता

आनंद सिंह को लोग इसलिए भी याद रखेंगे क्योंकि वे हमेशा जनता के बीच रहते थे। वे लोगों से मिलते, उनकी परेशानियां सुनते और उनका हल निकालने की कोशिश करते थे। उनकी पहचान सिर्फ नेता के तौर पर नहीं थी, बल्कि उनकी साफ-साफ बात करने और निडर स्वभाव की वजह से लोग उन्हें बेहद पसंद करते थे।

उनके निधन पर सभी पार्टियों के नेताओं ने दुख जताया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और सीएम योगी ने कहा कि आनंद सिंह ने यूपी की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी है और किसानों के लिए किए गए उनके काम को हमेशा याद रखा जाएगा।

आनंद सिंह का जाना प्रदेश की राजनीति में एक युग के खत्म होने जैसा है। उन्हें हमेशा एक जुझारू नेता, किसानों के सच्चे साथी और ‘यूपी टाइगर’ के नाम से याद किया जाएगा।

 

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