जय विलास पैलेस के पास ‘सड़क या सुरंग?’ 18 करोड़ की लागत में बनी सड़क ने खोले घटिया निर्माण के राज
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मशहूर जय विलास पैलेस के पास हाल ही में बनाई गई करोड़ों की नई सड़क बार-बार धंसने से शहरभर में हड़कंप मचा हुआ है। माधव नगर से चेतकपुरी को जोड़ने वाली इस सड़क का निर्माण करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से ‘वॉटर ड्रेन प्रोजेक्ट’ के तहत किया गया था। लेकिन इसके उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद से सड़क में लगातार दरारें और गहरे गड्ढे बनते जा रहे हैं। अब इस सड़क की जांच के लिए दो टीमों का गठन किया गया है।
बीते 10–15 दिनों में सड़क लगभग 8 से 9 बार धंस चुकी है। हालात ये हैं कि बारिश होते ही सड़क पर जगह – जगह बड़े – बड़े गड्ढे हो गए है, जिसमें कोई भी वाहन उसमें समा सकता है। कुछ जगह तो नीचे सुरंग जैसी गहराई नजर आ रही है।
धंसने की वजह क्या है?
जांच में सामने आया कि सड़क के नीचे 50 साल पुरानी वाटर लाइन में लगातार लीकेज हो रही है। इसी वजह से मिट्टी बह गई और सड़क बैठ गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, पुरानी पाइप लाइन को रिपेयर किए बिना सड़क बिछाना बड़ी चूक रही। घटिया निर्माण सामग्री और निगरानी में लापरवाही ने भी हालात बिगाड़े।
कार्रवाई और जांच
इस पूरे मामले की परते खोलने के लिए कलेक्टर रुचिका चौहान ने दो सदस्यीय तकनीकी जांच टीम बनाई है। यह टीम सड़क निर्माण से जुड़ी तकनीकी मंजूरी, इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता, ठेकेदार और संबंधित एजेंसियों की भूमिका तक की गहराई से जांच करेगी। टीम ने इसके लिए जरूरी दस्तावेज और जानकारी भी तलब कर ली है। 5 दिन के भीतर टीम यह तय करेगी कि सड़क का निर्माण तय मानकों और नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं। अगर खामियां मिलती हैं तो इसके पीछे जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और PWD के 8 इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई है।
लोगों में गुस्सा
बार-बार सड़क धंसने से लोगों की आवाजाही और सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है। बारिश के दौरान वाहन गड्ढों में फंस रहे हैं, जिससे आए दिन हादसे का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पाइप लाइन की समस्या पहले ही सुलझा ली जाती तो यह परेशानी ही नहीं होती। लोग ठेकेदार और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रहे हैं। इस पूरी घटना ने ‘स्मार्ट सिटी’ के दावों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। बुनियादी ढांचे की ऐसी अनदेखी ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक शहर की साख पर भी दाग लगा रही है।

