हमीरपुर में नियमों की दोहरी चाल: मरम्मत के नाम पर शव वाहन रोका, विधायक की गाड़ी को ‘खुली छूट’
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना ने प्रशासन के दोहरे मापदंडों और वीआईपी कल्चर की हकीकत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। मामला हमीरपुर के यमुना पुल का है, जहां मरम्मत कार्य का हवाला देकर एक शव वाहन को पुल पार करने से रोक दिया गया, लेकिन उसी दौरान विधायक की गाड़ी को बे रोक-टोक निकलने दिया गया।
घटना शनिवार की बताई जा रही है। सुमेरपुर क्षेत्र के टेढ़ागांव निवासी शिवदेवी नामक महिला का निधन अस्पताल में हो गया था। परिवार के लोग एम्बुलेंस में शव लेकर गांव लौट रहे थे। लेकिन जैसे ही एम्बुलेंस यमुना पुल पर पहुंची तो पुल पर मरम्मत कार्य का हवाला देकर पुलिसकर्मियों ने उसे रोक दिया। मृतका के बेटों ने हाथ जोड़कर अधिकारियों से शव को गांव तक पहुंचाने देने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
इसी बीच हमीरपुर सदर से विधायक मनोज प्रजापति की गाड़ी पुल पर आती दिखी। लोगों के मुताबिक जब आम जनता के लिए पुल पूरी तरह बंद था, तो उसी समय विधायक की गाड़ी को निकलने की इजाजत कैसे दी गई? घटना के बाद से इलाके में आक्रोश है और लोग पूछ रहे हैं कि क्या नियम-कायदे सिर्फ आम आदमी के लिए ही हैं?
हालांकि विधायक मनोज प्रजापति ने सफाई दी कि उनकी गाड़ी उस समय गुजरी जब पुल पूरी तरह बंद नहीं था। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एम्बुलेंस को रोक दिया गया तो फिर विधायक की गाड़ी कैसे पार हो गई?
इस घटना ने साफ कर दिया है कि सिस्टम में आम और खास के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। लोगों ने प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर अंतिम यात्रा तक में इंसानियत क्यों हार गई? क्या सत्ता और पद के आगे आमजन की भावनाएं कोई मायने नहीं रखतीं? फिलहाल घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन मौन साधे हुए हैं।

