रेप रोकने के लिए अकेली पुलिस नहीं काफी: डीजीपी मकवाना ने इंटरनेट, मोबाइल और समाज में नैतिक गिरावट को बताया जिम्मेदार
मध्य प्रदेश, उज्जैन के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने प्रदेश में बढ़ती बलात्कार की घटनाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। उज्जैन में डिवीजनल समीक्षा बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में डीजीपी मकवाना ने कहा कि रेप जैसी गंभीर घटनाओं को केवल पुलिस बल के दम पर रोकना संभव नहीं है। उन्होंने इसके लिए इंटरनेट, मोबाइल फोन, शराब और समाज में तेजी से गिरते नैतिक मूल्यों को जिम्मेदार ठहराया हैं।
डीजीपी ने कहा कि आज के दौर में इंटरनेट और मोबाइल फोन ने अश्लील सामग्री तक पहुंच को बेहद आसान बना दिया है। उन्होंने कहा, “कभी भी, कहीं भी, कोई भी मोबाइल के जरिए इन चीजों तक पहुंच सकता है। यह छोटी उम्र से ही युवाओं के दिमाग को बिगाड़ रहा है।” मकवाना ने बताया कि इस तरह की सामग्री युवाओं को गलत दिशा में ले जा रही है, जिससे उनके व्यवहार पर गहरा असर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले के मुकाबले समाज में नैतिक मूल्य कमजोर हुए हैं। पहले बच्चे अपने माता-पिता और शिक्षकों की बातें मानते थे, उनके भीतर शर्म और सम्मान का भाव होता था, लेकिन आज घरों में भी लोग एक-दूसरे पर नजर नहीं रखते। “पहले समाज में परिवार और स्कूल बच्चों के आचरण पर ध्यान रखते थे, लेकिन अब इन व्यवस्थाओं में ढीलापन आ गया है”।
डीजीपी मकवाना ने माना कि शराब की आसान उपलब्धता और उसके बढ़ते चलन ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। इसके लिए समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
मकवाना के इस बयान ने प्रदेश में एक नई बहस छेड़ दी है कि बलात्कार जैसी घटनाओं को रोकने में पुलिस के साथ-साथ समाज और परिवारों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस अपने स्तर पर कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है, लेकिन जब तक समाज नैतिक जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होगा। डीजीपी ने लोगों से अपील की है कि बच्चों पर नजर रखें, उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को मॉनिटर करें और घरों में संवाद बढ़ाएं, ताकि युवा पीढ़ी को गलत रास्ते पर जाने से रोका जा सके।

