ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका की सीधी एंट्री, परमाणु ठिकानों पर बमबारी से बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में अब अमेरिका ने सीधे दखल देकर हालात को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है। अब तक सिर्फ सहयोगी की भूमिका निभा रहा अमेरिका, अब ईरान के खिलाफ युद्ध में उतर आया है। अमेरिका के हमले ने पूरे मध्य पूर्व को संकट की ओर धकेल दिया है।
अमेरिका ने ईरान के तीन अहम परमाणु ठिकानों – फोर्डो, नतांज और एस्फाहान पर हमले किए। फोर्डो पर “बंकर बस्टर” बम (GBU-57) का इस्तेमाल हुआ, जो 300 फीट गहरे बंकर तक तबाही मचा सकता है। इन हमलों में B-2 स्टील्थ बॉम्बर और टॉमहॉक मिसाइलें भी शामिल रहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका अब सिर्फ समर्थन नहीं करेगा, बल्कि ईरान के खतरों को खत्म करने के लिए सक्रिय रहेगा। यह इजरायल के साथ अमेरिकी सैन्य सहयोग का बड़ा उदाहरण है। ईरान के गहरे बंकरों तक पहुंच पाना इजरायल के लिए मुश्किल था, लेकिन अमेरिका की तकनीकी और सैन्य ताकत ने उसे यह ताकत दे दी। इजरायल को अब बड़ा सामरिक लाभ मिल रहा है।
हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की बात कही गई है, जिससे तेल की आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। रूस और चीन ने अमेरिका के हमलों की निंदा की है। भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि उसके ईरान और इजरायल दोनों से अच्छे रिश्ते हैं। तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका की सीधी सैन्य भागीदारी ने इस क्षेत्रीय संघर्ष को वैश्विक संकट में बदल दिया है। अब यह सिर्फ ईरान और इजरायल का युद्ध नहीं रहा, बल्कि दुनिया की शांति और स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। यह सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन को बदलने वाला मोड़ है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है।

