ग्वालियर की सड़कों का हाल: पहली बारिश में खुली पोल
ग्वालियर में मानसून की पहली बारिश ने शहर के विकास के दावों की सच्चाई सामने ला दी है। एक ओर जहां लोग बारिश से राहत की उम्मीद कर रहे थे, वहीं सड़कों की हालत ने सबको चौंका दिया। शहर के कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह से टूट गई हैं, हर जगह गड्ढे हो गए हैं, और पानी भर जाने से स्थिति और भी खराब हो गई है। यह साफ दिखाता है कि सड़कों के बनाने और सुधारने के काम में कितनी लापरवाही बरती गई है।
प्रशासन हर साल सड़कों की मरम्मत और नए कामों पर करोड़ों रुपए खर्च करता है। लेकिन, पहली बारिश में ही इन कामों की असलियत सामने आ जाती है। इससे सिर्फ गाड़ी चलाने वालों को ही परेशानी नहीं होती, बल्कि आए दिन हो रहे हादसों से लोगों की जान को भी खतरा हो रहा है। स्कूल जाने वाली बसों, कारों और बाइक चलाने वालों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। शहर में ऐसा एक दो जगह नहीं है कि सड़के टूटी हुई हो, बल्कि यह पूरे शहर भर में जगह-जगह टूटी हुई है। जिससे आए दिन स्कूल की बसे, ऑफिस आने-जाने वाले लोगों की कार गड्ढों में फंस जाती है, जो प्रशासन की सच्चाई बताती है।
वैसे तो यह हर साल की कहानी है कि बारिश आते ही सड़कें टूट जाती हैं और प्रशासन सिर्फ भरोसा दिलाता रहता है। क्या सड़कें इतनी कमजोर बनाई जाती हैं कि वे एक बारिश भी झेल नहीं पातीं? जरूरत है कि प्रशासन सिर्फ कागजों पर काम करने के बजाय जमीन पर हकीकत को समझे और अच्छे से काम करें। जब तक अच्छी क्वालिटी का काम नहीं होगा, सड़कों की नियमित जांच नहीं होगी और जिम्मेदारी तय नहीं होगी, यह समस्या हर साल ऐसे ही आती रहेगी। मानसून की पहली बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विकास की बातें सिर्फ पोस्टरों और भाषणों तक ही हैं, असली हालत अभी भी वही पुरानी है।

