ईरान-इज़राइल युद्ध: मिसाइलों की बारिश, सैकड़ों ठिकाने तबाह, वेस्ट एशिया में बढ़ता युद्ध का संकट
इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खुले युद्ध की चपेट में आ चुका है। दोनों ओर से मिसाइल, ड्रोन और एयरस्ट्राइक का ज़ोरदार आदान-प्रदान हो रहा है, जिससे सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और भारी तबाही की खबरें आ रही हैं।
इज़राइली सेना ने पिछले 48 घंटों में ईरान के 200 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इनमें इस्फहान की परमाणु सुविधा, हथियार डिपो और रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांड सेंटर्स शामिल हैं। इज़राइल का दावा है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य ताकत को गहरा झटका लगा है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन इज़राइली शहरों की ओर भेजे। इन हमलों में कम से कम 13 नागरिकों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इज़राइल ने अपने आयरन डोम सिस्टम के जरिए कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट जरूर किया है, लेकिन नुकसान टल नहीं सका। दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और सीमाओं पर भारी सैन्य जमावड़ा हो गया है। अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और रूस जैसे बड़े देशों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध जल्दी नहीं रुका, तो यह पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। लेबनान स्थित हिज़्बुल्लाह, यमन के हूती और इराक की शिया मिलिशिया जैसे ईरान समर्थित गुटों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। वहीं इज़राइल ने भी संकेत दिए हैं कि वह अभी और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। जिससे स्थिति लगातार बिगड़ रही है। यह टकराव सिर्फ दो देशों का नहीं, बल्कि एक क्षेत्रीय और संभावित वैश्विक संकट का संकेत बन चुका है।

