ग्वालियर: 150 साल पुराने माँढरे वाली माता मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, चैत्र नवरात्रि पर दर्शन को लगीं लंबी कतारें
सिंधिया राजवंश और कर्नल आनंद राव से जुड़ा है मंदिर का गौरवशाली इतिहास; जयविलास पैलेस की खिड़की से आज भी जुड़े हैं श्रद्धा के तार
ग्वालियर। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत के साथ ही ग्वालियर के ऐतिहासिक मंदिरों में भक्ति का अनूठा उल्लास देखने को मिल रहा है। शहर के कैंसर पहाड़िया पर स्थित प्रसिद्ध माँढरे वाली माता मंदिर इस समय आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ब्रह्ममुहूर्त से ही यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहाँ श्रद्धालु कतार में लगकर माता रानी के जयकारों के साथ अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
स्वप्न से शुरू हुआ 150 साल पुराना इतिहास
इस मंदिर का इतिहास बेहद दिलचस्प और सिंधिया रियासत काल से जुड़ा है। बताया जाता है कि करीब 150 साल पहले सिंधिया सेना के कर्नल आनंद राव माँढरे माता के अनन्य भक्त थे। लोक मान्यता है कि माता ने उन्हें सपने में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया था। इसके बाद सिंधिया शासकों के सहयोग से इस पहाड़ी पर मंदिर की स्थापना की गई, जिसे आज ‘माँढरे वाली माता’ के नाम से जाना जाता है।
राजपरिवार और जयविलास पैलेस से खास जुड़ाव
यह मंदिर जयविलास पैलेस से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतिहासकार बताते हैं कि सिंधिया राजपरिवार की मंदिर के प्रति अटूट श्रद्धा रही है। महल में एक ऐसी विशेष खिड़की बनाई गई थी, जहाँ से राजपरिवार के सदस्य सीधे मंदिर के शिखर और माता के दर्शन किया करते थे। आज भी अष्टभुजा वाली माँ काली की यह प्रतिमा भक्तों के लिए चमत्कारिक मानी जाती है।
अद्भुत स्थापत्य और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कैंसर पहाड़िया पर स्थित इस मंदिर की वास्तुकला और यहाँ से दिखने वाला शहर का नजारा अद्भुत है। नवरात्रि के दौरान भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है और पीने के पानी व छाया की व्यवस्था की गई है ताकि चिलचिलाती धूप में भक्तों को असुविधा न हो।
सुबह और शाम होने वाली विशेष आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। मंदिर परिसर माता के भजनों और ‘जय माता दी’ के उद्घोष से गुंजायमान है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है, यही वजह है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक यहाँ मेला सा माहौल रहता है।

